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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का संक्षिप्त इतिहास –

       आधुनिक युग में अपने संवर्ग के अस्तित्व की रक्षा करने हेतु शिक्षक तथा कर्मचारी संगठन की नितांत आवश्यकता होती है। इसी दृष्टि से 1921 ई0 में प्राथमिक शिक्षकों ने अध्यापक मण्डल नाम की संस्था का गठन किया, जिसका उद्देश्य शिक्षा एवं शिक्षार्थियों के हितों की रक्षा करना था। शैनः शैनः  अध्यापक मण्डल शक्तिशाली होता गया तथा शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष करने लगा। 1951-52 में संघ ने प्रदेश व्यापी आन्दोलन किया। क्षुब्ध होकर सरकार ने इसकी मान्यता समाप्त कर दी। परन्तु 1957 में संगठन की शक्ति देखते हुए शासन को पुनः मान्यता प्रदान करने हेतु विवश होना पड़ा। अध्यापक मण्डल को नया कलेवर देते हुए वर्ष 1967 में इसे उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ नाम से मान्यता मिली। स्वर्गीय हीरालाल पटवारी, अध्यक्ष अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा को निकायों के फौलादी पंजों से मुक्त कराने हेतु सफल आंदोलन किया एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी सफलता प्राप्त की। धीरे-धीरे संघर्ष के बल पर प्राथमिक शिक्षक भी वेतन आयोग की परिधि में आये और उनको भी राज्य कर्मचारियों/अधिकारियों को मिलने वाली सुविधाएं प्राप्त होने लगी। उत्तर प्रदेश का शिक्षक संघ के प्रयासों से आज देश के अन्य राज्यों के शिक्षकों की अपेक्षा आर्थिक रूप से सम्मानजनक स्थिति में पहुॅच गया है।

संघ का कार्यालय :-

       संघ का प्रदेश स्तर का एक सुव्यवस्थित 30 कमरों वाला विशाल निजी भवन प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रिसालदार पार्क में स्थित है। कार्यालय सचिव, चपरासी एवं अन्य तीन कर्मचारी। संघ भवन में निजी टेलीफोन तथा संघीय कार्य के लिए आवागमन हेतु निजी टबेरा गाड़ी एवं जीप है। कार्यालय संचालन हेतु कम्प्यूटर, बेवसाइट, ई-मेल, फैक्स, फोटोकापी मशीन की सुविधा है। संगठन के मुख्यपत्र   ‘‘राष्ट्र प्रहरी शिक्षक’’ पत्रिका छापने हेतु अपना आटोमैटिक ऑफसेट प्रेस है।

संघ के प्रकाशन :-

       संघीय क्रिया कलापों को सदस्यों तक पहुॅचाने तथा अन्य शाध सामग्री एवं शिक्षण की नई विधाओं एवं आयामों को प्रसारित करने के लिए ‘‘राष्ट्र प्रहरी शिक्षक’’ पत्रिका का मासिक प्रकाशन किया जाता है। पत्रिका प्रकाशन हेतु संघ का अपना निजी आफसेट प्रिटिंग प्रेस है।

संगठन का कार्य :-

       संगठन का मुख्य कार्य प्राथमिक शिक्षकों में संगठन के प्रति एकता की भावना उत्पन्न करके शिक्षक समाज में संगठन को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान में संगठन का मुख्य कार्य प्राथमिक शिक्षकों के स्तर को ऊँचा उठाना है साथ ही संगठनोन्मुखी कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षकों के संगठनात्मक एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण के दायित्व का भी निर्वाह करना है।