यह शिक्षक वर्ग हैं ,सब समझते हैं
आरटीई में 2017 में संशोधन करके सभी कार्यरत शिक्षकों को टेट आपने अनिवार्य किया है तो पिछली सरकार की क्या गलती है ? पिछली सरकार ने तो 23 अगस्त 2010 के राजपत्र में आरटीई से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को स्पष्ट छूट दी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अध्यादेश भारत सरकार लायेगी ,तो पश्चिम बंगाल की सरकार से इसका क्या लेना देना है? यह इस प्रकार की गारण्टी है जैसे 2014 के यूपी चुनाव में शिक्षा मित्रों के लिए ली गई थी। जिसका परिणाम सब देख रहे हैं।
20 लाख शिक्षक तनाव में हैं,कुछ तो आत्महत्या कर चुके हैं। वकीलों की फीस हेतु शिक्षकों की मेहनत की कमाई जा रही है और आप राजनीतिक बयान दे रहे हैं। यदि इसी सत्र में यह अध्यादेश लाते हैं तो सही है ,अन्यथा शिक्षक सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए तैयार रहें…

